रानीखेत बीमारी (Ranikhet disease)
इसे 'न्यू कैसल' (New Castle Disease ) रोग भी कहते हैं। यह मुर्गियों की एक घातक बीमारी है। जिसमें पक्षियों का मुख्यतः श्वसन तंत्र एवं तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है। यह रोग सभी आयु की मुर्गियों में होता है। लेकिन इससे सबसे अधिक कम उम्र के चूजे प्रभावित होते हैं। इसका प्रभाव टर्की, कौआ, कबूतर, बत्तख, हंस, कोयल तथा तीतर पर भी होता है। मुर्गी पालकों को खासतौर से वर्षा ऋतु में इस रोग से काफी अधिक हानि उठानी पड़ती है।
रोग का कारक (Etiology) :- यह एक प्रकार के पेरामिक्सोवायरस टाइप -1 (Paramyxovirus type -1) द्वारा फैलता है। यह। वायरस निर्जलीकरण से और पराबैंगनी किरणों (धूप) में तेजी से नष्ट हो जाता हैं।
लक्षण (Symptoms):-
1. पक्षियों में दम फूलना, खांसना या छींकना रोग की प्रारंभिक अवस्था को प्रदर्शित करता है। इस समय उनका खाना भी कम हो जाता है।
2. नाक से सांस लेने में परेशानी आती है। तथा हांफते हुए मुंह को खोल कर सांस लेनी पड़ती है। श्वास लेते समय कभी-कभी सीटी की सी आवाज आती है।
3. कफ तथा लार का निकलना और नाक से पानी जैसे तरल पदार्थ का बहना।
4. ये सुस्त तथा आंखें बंद करके रखते हैं।
5. चूजों को बुखार हो जाता है। प्यास बहुत लगती हैं। और पीले हरे रंग के पानी जैसे बदबूदार दस्त लग जाते हैं।
6. पैर एवं पंखों में लकवा जैसे लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं।
7. गर्दन को उलट कर पीठ के ऊपर रखना या शरीर के अन्य भागों की ओर छिपाना तथा घर के कोने में छिप जाना।
8. रोग के बढ़ने पर चूजे मरने लगते हैं। रोग की भयंकर अवस्था में चूजों में इस बीमारी के कुछ ही लक्षण दिखाई देते हैं। और वे अचानक मरने लगते हैं। परंतु प्रौढ़ पक्षी कुछ देरी से मरते हैं।
उपचार (Treatment ) :- वर्तमान में किसी भी मूल्य का कोई कारगर इलाज नहीं हैं। उचित आवास और सामान्य देखभाल अच्छी तरह से करना ही बचाव है।
रोकथाम (Prevantion and control ) :- इसकी रोकथाम निम्न प्रकार की जा सकतीं हैं -
1. बीमार पक्षियों का कत्लेआम करना।
2. पक्षियों को 10 -15 के समूह में छांट कर अलग करना और प्रत्येक समूह को अलग परिचारिकाओं में रखना।
3. पोल्ट्री फार्म के साफ सफाई के अवशेषों से सभी संक्रामक सामग्री को हटाना ।
4. पोल्ट्री फार्म यातायात के साधनों से दूर होना चाहिए।
5. पोल्ट्री फार्म पर मुर्गियों की देखभाल हेतु अलग से नौकर रखना चाहिए।
टीकाकरण -
1.
A. चूजों की आयु - प्रथम दिन
B. रोग - रानीखेत (New castle)
C. टीका - वैक्सीन स्ट्रेन एफ या लसोटा
D. संरक्षण की अवधि - प्रशीतक में तीन माह तथा कमरे के तापक्रम पर 10 दिनों तक।
E. प्रतिरक्षा - 15 सप्ताह
F. प्रयोग विधि - नाक के अन्दर
G. मात्रा - एक - एक बूंद दोनों नाक में।
2. A. चूजों की आयु - 8-12 सप्ताह
B. रोग - रानीखेत (New castle)
C. टीका - वैक्सीन मुक्तेश्वर ( स्ट्रेन - R2B) पर 10 दिन तक।
D. संरक्षण की अवधि - प्रशीतक में तीन माह तथा कमरे के तापक्रम पर
E. प्रतिरक्षा - जीवन पर्यन्त
F. प्रयोग विधि - अन्त: पेशीय
G. मात्रा - 0.5 मिली / पक्षी


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