रतनजोत 

वानस्पतिक नाम - जेट्रोफा कर्कस एल. (Jatropha quercus L.)

कुल - यूफोरबियसी 

उत्पति - उतर - पश्चिम व मध्य भारत

उपयोगी भाग - बीज 


रतनजोत या जंगली अरंड एक झाङीनुमा 2 - 7 फीट ऊंचा वन औषधीय पौधा है, जो भारत के सभी प्रांतों में पाया जाता है। यह साधारणतया पड़त भूमि एवं कृषि भूमि के चारों ओर बाड़ के रूप में पाया जाता है। राजस्थान में यह दक्षिणी अरावली पर्वतमाला के जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में पाया जाता है। इसका औषधीय उपयोग अधिक होने के कारण यह अति महत्त्व का हो गया है। इसमें पाया जाने वाला तत्व कैंसर प्रतिरोधक क्षमता वाला होता है। कैंसर संबंधी औषधियों में इसका उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त बीजों द्वारा प्राप्त तेल का उपयोग दाद, खुजली, गठिया लकवा आदि बीमारियों में किया जाता है। इसके पत्तों के स्वरस का उपयोग बवासीर तथा उदर संबंधी रोगों में किया जाता है।


उसके उपयोग के अतिरिक्त रतनजोत औद्योगिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण पौधा है। इसे सौंदर्य प्रसाधन, साबुन बनाने, रंगाई में, पशु आहार, कुक्कुट आहार, कीटनाशक आदि बनाने के कच्चे पदार्थ के रूप में भी उपयोग किया जाता है।

रतनजोत के बीजों के तेल का जैविक ईंधन (बायोडीजल) के रूप में भी काम ले सकते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह ईंधन के रूप में मील का पत्थर साबित होगा।