टिड्डा का वर्गीकरण -
संघ - आर्थोपोडा
वर्ग - इन्सेक्टा
गण - आर्थोप्टेरा
कुल - एक्रिडिडी
वंश - हीरोग्लाइफस
जाति - बेनियन/ निग्रोलिप्लेटस
संरचना - टिड्डे का शरीर तीन भागों से मिलकर बना होता है।
1. शीर्ष ( Head )
2. वक्ष ( Thorax )
3. उदर ( Abandomen )
1. शीर्ष - 6 खण्डों से मिलकर बना होता हैं
उपांग -
a. एन्टिना ( श्रंगिका) - यह संख्या में दो होती हैं इनका मुख्य कार्य स्वाद, गंध, कंपन, स्पर्श व दिशा का ज्ञान।
b. संयुक्त नेत्र - यह संख्या में दो होते हैं। इसके एक भाग को दो ओमेटिडियम कहते हैं।
c. उपनेत्र/ ओसेलाई
d. मुखांग - टिड्डे के मुखांग काटने व चबाने प्रकार के होते हैं। मुखांग की स्थिति हाइपोग्नेथस प्रकार की होती हैं।
टिड्डे शाकाहारी और विश्वव्यापी होते हैं इन्हें खरीफ का टिड्डा कहते हैं।
2. वक्ष - यह तीन खण्डों से मिलकर बना होता है।
a. प्रोथोरेक्स
b. मीजोथोरेक्स
c. मेटाथोरेक्स - यह शक्तिशाली एवं कूदने में सहायक होता हैं। इसके भी पांच भाग होते हैं-
अ. कोक्सा
ब. ट्रोकेण्टर
स. फीमर
द. टीबिया
य. टारसस
वक्ष के दूसरे व तीसरे खंड में 2 जोड़ी पंख पाए जाते हैं।
3. उदर - यह खंड 11 खंडों से मिलकर बना होता हैं कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि वास्तव में यह 10 खंड होते हैं।
खंड के पृष्ठ भाग को टरगम कहते हैं ।
अधर भाग को स्टरनम कहते है ।
पार्श्व भाग को प्लूरोन कहते हैं।
पार्श्व भाग में श्वसन छिद्र या स्पाइरिकल्स होते हैं 1 से 8 वें खण्ड तक प्रत्येक में दो जोड़ी होते हैं। दो जोड़ी वक्ष भाग में होते हैं। मादा के अन्तिम खंड नुकिले होते हैं। जिसे Ovipositer / अण्डोत्सर्ग अंग कहते हैं
टिड्डे का जीवन चक्र - इनमें एक साल में एक पीढ़ी ही पाई जाती है। इसमें अपूर्ण कायांतरण पाया जाता हैं।
1. अण्डा
2. निम्फ
3. वयस्क
नर व मादा मैथुन के पश्चात अंडे देना प्रारंभ कर देती है मादा अपने अंडों को अण्डरोपक की सहायता से जमीन में गाड़ देती है मिट्टी में अंडकोष की सहायता से गड्ढा कर देती है इसमें 15 से 80 अंडे होते हैं मादा देने के बाद मर जाती है क्योंकि अंडे देने की प्रक्रिया में मादा अपने अंडकोष को क्षतिग्रस्त कर देती है अंडों की सुरक्षा के लिए जागदार पदार्थ छोड़ती हैं जो सीमेंट की तरह जम जाता है इनके अंडे हल्के पीले, चावल के दाने के समान होते हैं ज्यादातर मादाएं नम और रेतीली मिट्टी में अंडे देना पसंद करती है लगभग 9 माह तक अंडे मिट्टी में रहते हैं वर्षा ऋतु में निम्फ बाहर आते हैं पहला शिशु पंख रहित होता है इसीलिए हाॅपर कहते हैं इन्हें निम्फ व्यस्क बनने में 70 से 80 दिन लगते हैं निम्फ से वयस्क बनने में 5 बार निर्मोचन करते हैं मादा की तुलना में नर जल्दी ही विकसित हो जाते हैं।
महत्व - यह फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं टिड्डे इको सिस्टम के लिए आवश्यक है क्योंकि उनके अपशिष्ट पदार्थ से खाद और शरीर से नाइट्रोजन मिलती है यह परभक्षियों का भोजन होते हैं पौधों की अवांछित वृद्धि को 10% कम करते हैं दक्षिण मेक्सिको में चापूलाइन और टोरटोलिस नाम से व्यंजन बनाकर खाए जाते हैं डेंगू मैन नाइट मार्केट चीन में है। ओहलोन अमेरिकी जनजाति गड्ढों में घास जलाकर इन्हें पकड़ती है।
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