'हे' बनाना तथा सुखाना

                (Method of Curing Hay)


(अ) खेत में 'हे' बनाना (Curing of Hay in field)

(1) समतल भूमि पर तैयार करना - 'हे' बनानें के लिए फसल को जब इस पर फूल आ रहा हो सुबह के समय ओस हट जाने के बाद काटकर खेत में फैला देना चाहिए। फसल को 9"-12" मोटी तह के रूप में संपूर्ण खेत में फैलाते हैं। समय-समय पर इसे पटकते रहना चाहिए। जब जल की मात्रा लगभग 14% हो तो इसे ऐसे स्थान पर इकट्ठा करना चाहिए जहां वर्षा का बचाओ हो।



(2) शोष पंक्तियों को तैयार करना (Windrows method) - फसल को खेत में एक दिन तक समतल पड़ी रहने के बाद से पूरे क्षेत्र में छोटी-छोटी ढेरियों के रूप में इकट्ठा करतें हैं समय-समय पर उलटते रहना चाहिए। 


(3) तिपाई विधि (Tripod method ) - तराई वालें क्षेत्रों में जहां वर्षा अधिक होती हैं वहां फसल को तिपाये पर गाढ़कर उन पर फैला देते हैं। इस प्रकार ये हवा और धूप से सुख जाती हैं। 




(ब) शस्यागार ‌शोषण विधि (Barn dying method ) - मौसम की प्रतिकुलता होने के परिणामस्वरूप जहां 'हे' खेतों में नहीं तैयार की जा सकती वहां 'हे' निर्माण कार्य के लिए शस्यागार शोषण विधि अपनायी जाती है। यह शोषण की कृत्रिम विधि है जिसमें यांत्रिक जिसमें सहायता लेनी पड़ती है। शस्यागार के फर्श में नालियां बनी होती हैं जिनके द्वारा गर्म वायु को अंदर प्रवेश कराया जाता है। यह बिजली द्वारा अथवा तेलीय ईंधन से चालू किया जा सकता है। पहले फसल को थोड़े समय के लिए खेत में ही सुखाया जाता है ताकि जल की मात्रा 25% शस्यागार में आते समय हो क्योंकि इस विधि में अधिक खर्च होगा। इस विधि से तैयार की गई 'हे' में विटामिन ए. की मात्रा अधिक रहती है। परंतु किण्वीकरण द्वारा पोषक तत्वों की हानि अधिक हो जाती हैं।


भारत में 'हे' बनानें में बाधाएं (Limitations in hay making in india) - 

1. यहां का औसतन कृषक निर्धन है। वह अपना धन अधिक समय तक नहीं लगा सकता है।

2. भूमि की कमी होने के कारण पशुओं के चारे बहुत कम क्षेत्र में उगायें जाते हैं। अधिकतर अनाज की फसलें बोई जाती हैं।

3. घासे अधिकतर वर्षा में तैयार होती हैं जबकि 'हे' बनाना इस मौसम में कठिन है। 

4. सिंचाई साधन अपर्याप्त हैं।