ईसबगोल (Psyllium)

सामान्य नाम (Common name ) - ईसबगोल

वानस्पतिक नाम (Botanical name ) - प्लांटैगो ओवेटा फास्कर् (Plantago ovata Forsk)

कुल (Family)- प्लांटैजिनेसी (Plantagineceae) 


इसबगोल एक महत्वपूर्ण औषधीय फसल है। इसका मूल उत्पत्ति स्थान पश्चिम एशिया है। भारत इसका सर्वाधिक उत्पादक एवं निर्यातक देश है। भारत में मुख्य रूप से गुजरात एवं राजस्थान में उगाया जाता है। गुजरात के मेहसाणा और साबरकांठा जनपदों में लगभग 50,000 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती की जा रही है जबकि राजस्थान के जालोर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, नागौर और सिरोही जनपदों में लगभग 5000 हेक्टेयर क्षेत्र में उगाया जा रहा है। विगत कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों जैसे - मंदसौर जनपद की मल्हारगढ़, मनासा, नीमच एवं मंदसौर तहसीलों में लगभग 5000 हेक्टेयर क्षेत्र में इसका उत्पादन किया जा रहा है। इसबगोल उत्पादन की सरल प्रक्रिया थोड़े समय में अधिकाधिक लाभ दिलाने वाली एवं इसके उत्पादन की बिक्री हेतु पर्याप्त निर्यात बाजार के साथ-साथ शासकीय मंडी जैसी उत्तम व्यवस्था के कारण इस औषधीय फसल को भारतीय कृषकों ने सहर्ष स्वीकार किया है। उल्लेखनीय बात यह है कि वर्तमान में भारत से निर्यात होने वाली औषधीय फसलों में इसबगोल का प्रथम स्थान है। कुछ भारतीय उत्पादन का 90% भाग विदेशों में निर्यात किया जाता है। जिससे विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। यदि इसे एक बहुउपयोगी एवं निर्यातोन्मुखी फसल की संज्ञा दी जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।


औषधीय उपयोग (Medicinal usese) - 

ईसबगोल के बीज एवं भूसी का विभिन्न प्रकार से औषध निर्माण में उपयोग किया जाता है, ईसबगोल पर आधारित अनेकों औषधीय और पाउडर एवं भूसी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रचलित हैं।

 

- ईसबगोल की भूसी पुराने कब्ज, अतिसार, पेट की सफाई, बवासीर मूत्र संस्थान, आॅव - पेचिश जैसी शारीरिक रोगों को दूर करने हेतु आयुर्वेदिक औषधियों में मुख्य रूप से प्रयुक्त की जाती हैं।

- ईसबगोल का काढा सर्दी जुकाम में पिया जाता है।

- इसका सौंदर्य प्रसाधन में उपयोग किया जाता है

- इसबगोल का डाईंग, केलिको प्रिंटिंग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों जैसे - आइसक्रीम निर्माण और रंग रोगन के काम में भी प्रयोग किया जाता है।

- इसबगोल का बचा छिलका प्रोटीन का मुख्य स्रोत होता है जिसे मुर्गियों के आहार के रूप में उपयोग किया जाता है।