तुलसी (Ocimum)

प्रचलित नाम (Common name) - तुलसी, तुलसा, तुलिन। 

वानस्पतिक नाम (Botanical name ) - ओसीमम प्रजाति (Ocimum species)

कुल (Family) - लेमिएसी (Lamiaceae) 


तुलसी औषधीय गुणों की दृष्टि से एक 'अमृत बूटी' है। भारत में ही नहीं, अपितु विश्व में व्यापक रूप से तुलसी पाई जाती है। तुलसी का जन्म स्थान एशिया के उत्तरी पूर्वी क्षेत्र माने जाते हैं। तुलसी के पौधे आज भी जंगली अवस्था में विश्व के अनेक क्षेत्रों में पाए जाते हैं।  हिंदू समाज में तुलसी की पूजा की जाती है और उनके द्वारा प्रतिदिन पौधे का जल चढ़ाना एक पुनीत कार्य माना जाता है, इसका वर्णन पुराने ग्रंथों में मिलता है। तुलसी एक ऐसा पौधा है इसके सेवन से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान होता है। इसकी हरी पत्तियों का सेवन उपयुक्त है, लेकिन औषधियों के लिए इसके तेल का उपयोग किया जाता है। इसके तेल की विदेशों में भारी मांग है, जिसके निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित होती जाती है।

तुलसी अनेक सुगंधित तेलों का अच्छा स्त्रोत है जो हल्के हरे रंग का होता है। इसके तेल में कपूर (कैंफर), सिट्राॅल, जिरोनिओल, निनाइल एसीटेट, मिथाइल, यूजिनॉल और प्रसाधन सामग्री बनाने में किया जाता है। डेंटल क्रीम, माउथवाश,बेकरी, सूप, सलाद, साॅस, जेम, मुरब्बे और औषधीय रूप में इसके विभिन्न रंगों का उपयोग किया जाता है। तुलसी के रस को शहद के साथ लेना कैंसर रोग के उपचार में उपयोगी है। तुलसी स्वाद में चटपटी, कड़वी हल्की रूखी, पचने पर कूट एवं गर्म स्वभाव की होती है। यह विभिन्न रोगों का नाश करने वाली दिव्य औषध है। यह मलेरिया, श्वास,कफ,उल्टी महिलाओं में होने वाले रोग, गठिया, स्नायु, गुर्दा की खराबी से उत्पन्न शोथ, पथरी, सफेद दाग में कोलेस्ट्रोल की मात्रा का बढ़ जाना आदि में नियमित रूप से सेवन करने से लाभ होता है। तुलसी में औषधीय गुणों के अतिरिक्त अनेक ऐसे भी गुण हैं जो जीवन एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं। तुलसी का नियमित सेवन हृदय को शक्ति प्रदान करता है।