जीवन चक्र - मधुमक्खियों का जनन काल प्रारंभ होने पर रानी मधुमक्खी अनेक नर मक्खियों के साथ छतें से बाहर निकलकर हवा में उड़ती है। और उड़ते समय ही नर व रानी मक्खी में मैथुन होता हैं।
मधुमक्खियों में जनन काल ग्रीष्म ऋतु में प्रारंभ हो जाता है और इसी जनन काल के दौरान रानी मक्खी नर मक्खियों के साथ छतें से बाहर निकलती है।
जब रानी मक्खी नर मक्खी के साथ हवा में उड़ती है जब उड़ते उड़ते नर व रानी के बीच में मैथुन हो जाता है मैथुन के पश्चात रानी मक्खी छतें में वापस लौट आती हैं और अण्डे देना प्रारंभ कर देती हैं। नर मक्खी या ड्रोन मर जाता हैं।
ड्रोन क्यों मर जाता हैं - मैथुन के समय नर मक्खी के जो जनन अंग होते हैं वो बहुत तेज शक्ति से बाहर निकलते है वापस अंदर नहीं जातें हैं रानी मक्खी से चिपक जाते हैं इसीलिए ड्रोन मक्खी मर जाती हैं । इसके पश्चात रानी छतें में लौट आती है।
जब रानी मक्खी अण्डे देती हैं जिनको श्रमिक मक्खियां छतें के कोष्ठक में रखतीं हैं एक अण्डे को एक कोष्ठक में रखतीं हैं।
रानी मक्खी दो प्रकार के अण्डे देती हैं -
1. निषेचित द्विगुणित अण्डे - श्रमिक व रानी बनतीं है
2. अनिषेचित अगुणित अण्डे - ड्रोन का निर्माण होता हैं
प्रत्येक अण्डे से लगभग तीन दिन बाद एक छोटा सा सुंडी जैसा शिशु या लार्वा निकलता है
दो दिन तक प्रत्येक लार्वा को आया मक्खियां शाही जैली खिलाती हैं इसके बाद रानियों की लार्वा का पोषण तो शाही जैली से किया जाता हैं परंतु नर व श्रमिक मक्खियों की लार्वा को केवल मधु व पराग दिया जाता हैं।
सक्रिय पोषण के बाद प्रत्येक लार्वा में तीव्र वृद्धि होती है।कायांतरण द्वारा प्यूपा युवा मक्खी में बदल जाता हैं इनमें पांच बार निर्मोचन होता हैं पांचवें त्वकपतन के बाद प्रत्येक लार्वा के कोष्ठक में प्रत्येक लार्वा अपने चारों ओर एक कोकून बना लेता है। और कोकून के भीतर कायांतरण द्वारा प्यूपा में बदल जाता हैं कायांतरण द्वारा प्रत्येक शीघ्र ही एक युवा मक्खी में बदल जाता हैं। जो अपने मेन्डीबुल्स की सहायता से कोकून तथा टोपी को काटकर बाहर निकल आती हैं एक नए छतें में सारी मधुमक्खियां एक ही रानी मक्खी की सन्ताने होती हैं।
निषेचन बाद कौनसा जंतु मर जाता हैं - ड्रोन मक्खी या नर मधुमक्खी
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