दुग्ध दोहन की विधियां (Methods of milking) 

दुधारू पशुओं का दूध निकालना एक प्रकार की कला है। इस कला में अनुभवी व्यक्ति शीघ्र ही पूर्ण दूध निकाल सकता है। अनुभवहीन व्यक्ति पशु का पूरा दूध नहीं निकाल सकता है।

 "गाय के अयन में एकत्रित दूध को थनों द्वारा बाहर निकालने की क्रिया को दुग्ध दोहन कहते हैं"

दोहन दो प्रकार से किया जाता है - 

1. मशीन द्वारा

2. हाथों द्वारा 


1. मशीन द्वारा - ज्यादातर पश्चिमी देशों में दोहन का कार्य मशीनों द्वारा किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों से भारत में भी मशीन द्वारा दुग्ध दोहन का प्रचलन बढ़ा है। परंतु यह केवल राजकीय फार्म या बड़े व्यावसायिक डेरी फार्म तक ही सीमित हैं। संकर गायों की बढ़ती संख्या के साथ ही मशीन द्वारा दूध निकालने को प्रोत्साहित करना होगा। जहां मशीनों द्वारा दूध निकाला जाता है। वहां विद्युत आपूर्ति निरंतर होना आवश्यक है। 

मशीन द्वारा दुग्ध निकालने के निम्न लाभ है  -  

1. स्वच्छ दुध उत्पादन में सहायता मिलती है।

2. श्रमिकों की आवश्यकता कम पड़ती हैं।

3. पशुओं की संख्या अधिक होने पर दूध शीघ्रता से निकाला जा सकता हैं।

4. अधिक दूध देने वाले पशुओं में इस विधि द्वारा दूध दोहन में सुविधा मिलती हैं।


दोष - 

इस विधि का मुख्य दोष है कि यदि पूर्ण दूध निकालने के बाद , मशीन समय ‌पर बंद न हुई तो खुन भी निकल सकता है।


2. हाथों द्वारा - 

इस विधि में थन का अंगूठा और प्रथम अंगुली के मध्य मजबूती से पकड़ा जाता है। इसके बाद थन को उसी स्थिति में नीचे की ओर खिंचते हुए एवं ऊपर से नीचे तक हाथ खिसकाते हुए दूध की धार निकालते हैं। इस क्रिया को शीघ्रता से तब तक दोहराते हैं। जब तक थन का संपूर्ण दूध ना निकल जावे। इस विधि का उपयोग छोटे थन वाली गाय एवं भेड़ों का दूध निकालते समय या अंत में जब थनों थोड़ा सा दूध शेष रह जाए उसे निकालने के लिए करना चाहिए।


दोष 

इस विधि से पशु को दूध दोहते समय कष्ट होता हैं।


2. अंगूठा दबाकर - इस विधि में चारों अंगुलियों को थन के चारों ओर लगाकर अंगूठा बीच में दबाकर दूध निकाला जा सकता है। इस विधि से दूध निकालते समय पशु को कष्ट होता है। जिससे पशु पूरा दूध नहीं उतारता है। कई बार अंगूठे दबाव के कारण थन को भी क्षति पहुंचती है। इस विधि द्वारा लगातार दूध निकालने से थन खराब होने की संभावना रहती है। कभी-कभी थन में गांठ पड़ जाती है। इस विधि द्वारा पशु को नहीं दोहना चाहिए।



3. पूर्ण हस्त दोहन विधि - इस विधि में हथेली एवं चारों अंगुलियों के बीच में थन को दबाकर दूध निकाला जाता है। अन्य विधियों की अपेक्षा इस विधि में दूध अधिक तेजी से दुहा जाता है। यह विधि मध्यम एवं बड़े वाले पशुओं के लिए उपयुक्त है।

1. इस विधि से पशुओं को किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता हैं। 

2. थनों में गांठ बनने का भय नहीं रहता है।