परंपरागत खेती से प्रमाणित जैविक खेती की ओर : उभरती आशाएं
भोजन जल और शुद्ध वातावरण हमारे जीवन का मुख्य आधार है और कृषि इसका मूल स्तंभ है। पिछले 7 वर्षों में विज्ञान आधारित कृषि का प्रसार हुआ है। साथ ही कृत्रिम संसाधनों के बढ़ते प्रयोग से कृषि की सतत क्षमता पर चिंताएं बढ़ी है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व के अंतर्गत रसायन मुक्त जैविक खेती एक महत्वपूर्ण प्रयास से रसायन मुक्त जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 5 वर्ष पूर्व सरकार ने परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) तथा उत्तर-पूर्व भारत में जैविक मूल्य श्रंखला योजना प्रारंभ की। भारत सरकार एवं किसानों के सम्मिलित प्रयास से आज देश के 36 लाख किसान 38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती कर रहे हैं।
इसके अतिरिक्त हमारे देश में अनेक ऐसे क्षेत्र हैं जहां आज भी पारंपरिक जैविक खेती हो रही है इस पारंपरिक जैविक क्षेत्रों को जैविक प्रमाणीकरण सुलभ कराने हेतु PGS के अंतर्गत Marge area सर्टिफिकेट का प्रावधान दिया गया है। इस प्रक्रिया की विशिष्टता यह है किस्म प्रमाणीकरण मात्र 2 से 3 महीनों में ही हो जाता है जबकि सामान्य परिस्थितियों में इसमें 2-3 वर्ष का समय लगता है।
अंडमान निकोबार केंद्र शासित प्रदेश के कार निकोबार एवं में कोबरा द्वीप समूह देश के सर्वप्रथम ऐसे प्रमाणीकरण जैविक क्षेत्र हैं।
अभी हाल ही में सम्पूर्ण लक्ष्यद्वीप को जैविक खेती के रूप में प्रमाणित किया गया है।
वर्ष 2016 में सिक्किम राज्य को पूर्ण जैविक कृषि राज्य प्रमाणित हो चुका है ।
सुदुर उतर में हिमालय श्रंखला के बीच लद्दाख में भी पूर्ण जैविक लक्ष्य की ओर बढ़ना शुरू कर दिया है। जैविक उत्पादों को बाजार सुलभ कराने तथा किसानों की उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने के लिए एक समर्पित जैविक खेती पोर्टल एप्प भी बनाया गया है। जैविक खेती पोर्टल के जानकारी मंच और विपणन मंच के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता उत्पादन तथा बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है आशा है देश के सभी राज्य अपने जैविक क्षेत्रों का विकास करेंगे और देश में जैविक कृषि क्रांति को मजबूत करने में योगदान देंगे जैविक उत्पादों कि देश और विदेशों में बढ़ती मांग तथा जैविक उत्पादों का बढ़ता बाजार किसानों की उपभोक्ताओं तक पहुंच तथा जैविक FPO द्वारा जैविक कृषि व्यापार में भागीदारी हमारे किसानों को अपनी आय बढ़ाने का अवसर दे रहा है पिछले 5 वर्षों में जैविक कृषि उत्पादों का निर्यात दोगुने से बढ़कर 7000 करोड रुपए से अधिक का हो गया है इसमें प्रतिवर्ष बढ़ोतरी 20 प्रतिशत से अधिक हो रही है। उम्मीद है कि पारंपरिक क्षेत्र के किसान भी इस बढ़ते बाजार में लाभान्वित होंगे और जैविक कृषि आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।
"किसानों की निष्ठा, समृद्ध हिंदुस्तान की है पहचान"।


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