गेहूं का अनावृत या छिदरा कण्ड रोग - 

प्रकोप क्षैत्र - इस रोग को भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है 

पंजाब में कन्जीयारी, केरजुवा, कंदुआ, कांडी, कामया, कालिमा, शिथिल,  शलथ, से भी जाना जाता है।

भारत में जहां गेहूं का उत्पादन होता है वहां पर सामान्य रूप से पाया जाता है मुख्य रूप से यह उत्तरी भारत में देखने को मिलता है जैसे पंजाब-हरियाणा, मध्य प्रदेश,उ प्रदेश, राजस्थान आदि।

रोगजनक - Ustilago segetam var. tritici 

इस रोग के लक्षण प्रारंभ में नजर नहीं आते हैं लक्षण गेहूं के पूर्ण विकसित होने के बाद बालियां निकलते समय दिखाई देते हैं पौधे में बालियां समय से पहले निकल आती हैं रोगी पौधे की बालियों में दानों के स्थान पर काला चूर्ण नजर आता है प्रारंभ में बालियां पतली -च झिल्ली से ढकी रहती है कुछ समय के बाद यह झिल्ली फट जाती हैं और बीजाणु वायु में मुक्त हो जाते हैं। अन्य पादपों को संक्रमित करना शुरू कर देता है इसलिए इस रोग का नाम अनावृत कण्डवा रखा गया।


शुरुआती अवस्था में इसके बीजाणु पीले - भूरे रंग के होते हैं इनका आकार गोलाकार या अंडाकार होता है बीजाणुओ की बाहरी भिति कांटेदार होती है बीजांड पादप के पुष्प क्रम पर अंकुरित होकर प्राकतंतु बनाते हैं यह प्राकतंतु 4 कोशिका के बने होते हैं कोशिकाओं से विशेष तंतु बाहर निकलते हैं उन्हें संक्रमण सूत्र कहते हैं सभी कोशिकाओं के संक्रमण सूत्र आपस में जुड़ कर एक द्विकेंद्रकी तंतु का निर्माण करते हैं यह तंतु गेहूं के पुष्प के भ्रूण पर प्रवेश करने के बाद यह बीज के भीतर निष्क्रिय अवस्था में रहता है इसलिए इस रोग का संक्रमण अंत: बीजोढ प्रकार का होता है इस प्रकार के बीजों की बुवाई करने पर पौधा रोग ग्रस्त हो जाता है 



Open your trading and investment account for free.⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️⬆️



रोग चक्र - गेहूं के दाने में रोगजनक निष्क्रिय अवस्था में रहता है जैसे ही उन बीजों की बुवाई करने पर यह पौधे की वृद्धि के साथ-साथ वृद्धि करते हैं पादप में पुष्पन के समय बीजाणु निर्माण प्रारंभ किया जाना चाहिए।बीजाणु संक्रमण सूत्र का निर्माण करते हैं।


प्रबंधन - बीज जनित रोग होने के कारण मुख्य उपचार बीज उपचार करना होता है बीज उपचार में बीजों को 2 से 4 घंटे तक ठंडे पानी में होने के बाद 54 से 55 डिग्री सेंटीग्रेड 10 मिनट तक रखें या धूप में सुखाकर बीज उपचार करें। 

कार्बोक्सीन कवकनाशी ( 2 - 2.5 gm/kg ) से बीजोपचार करते हैं।

खड़ी फसल में संक्रमित पौधों को उखाड़ कर फेंक दें और संक्रमित बीजों की बुवाई न करें। 

प्रतिरोधी किस्म - कल्याण सोना,  WG -307, C- 302, PB18 ।